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बात बना देता हूं बातों बातों में

                
                                                         
                            बात बना देता हूं बातों बातों में,
                                                                 
                            
मैं ऐसा ही स्पष्ट वक्ता हूं।
कीमत दूसरे क्या जानें ?
क्या मैं इतना सस्ता हूं ?
काम पड़े कुछ और,
काम निकले कुछ और,
मैं उन लोगों से बचता हूं।
काम पड़ा और प्रयोग कर लिया,
क्या मैं रिम का दस्ता हूं ?
लोगों ने समझ क्या रखा है ?
शायद मैं उनके लिए आसान रस्ता हूँ।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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