आँखें मिलाते हो कभी कभी,
प्यार का इजहार कैसे करें ?
जिस उम्मीद से देखते थे हम,
अपने भावों को कैसे भरें ?
जवाब हां मैं होगा या ना में,
यह सोच सोचकर हम डरें।
यदि हम हिम्मत जुटा भी लें,
आगे बढ़ने की पहल कैसे करें?
-चंद्र दत्त शर्मा
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