आज कन्हैया का बोल बाला है,
यत्नों से माँ यशोदा ने पाला है।
जन्म हुआ माता देवकी से,
बचपन माँगा मां यशोदा ने,
रात में काली अंधियारी छाई,
मेघा बरस रहे घन घोर,
सुहाने जन्म की घड़ी आई,
तभी सब बंधन खुल गए,
पिता बासुदेव को गोकुल की याद आई,
कंस के डर ने...,
कान्हा को नंद बाबा के यहां पहुंचाया,
कान्हा ने गोकुल बरसाने में रास रचाए,
इन्होंने हर परिस्थिति में अपने को ढाला है।
आज कन्हैया का बोल बाला है,
यत्नों से माँ यशोदा ने पाला है।
-चंद्र दत्त शर्मा
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