कहते हैं महान उसे,
कि रावण ने बिन अनुमति माँ सिया को न छुआ।
क्या जानते नहीं?
नलकूबर की प्रेयसी रंभा को जब उसने छला था,
रावण के अनैतिक स्पर्श से उसका सम्मान जला था।
तब हुआ था रावण अचंभा,
जब नलकूबर का श्राप पड़ा था गंभीर:
"छुआ जो बिन अनुमति किसी नारी को,
तो भस्म होगा तू और तेरा ये दंभ अधीर!"
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