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प्रभु बोले मैं तो संकेत देता रहा

                
                                                         
                            विधाता ने जब सृष्टि को रचा
                                                                 
                            
सब जीव जंतु को बनाया
अंत में उसने मानव को घड़ा
जो सब प्राणियों में श्रेष्ठ हो, उत्तम हो,
बुद्धिमान और विचारवान हो
विधाता ने कहा मानव
सब जीवों में श्रेष्ठ होने पर गर्व मत करना
उसका उपयोग लोक कल्याण में लगाना

मानव ने हां कह स्वीकारा
सभी प्राणियों की मृत्यु निश्चित हो
पर प्रभु आप चेतावनी तो अवश्य देंगे
धरती पर पहुंच कर मानव,
मोह माया, लोभ, अहंकार के जाल में फंस गया
इंद्रिय सुख में लिप्त हो गया

बचपन बीता खेल कूद में
जवानी घर परिवार में
बुढ़ापा आया अब रोग सताया
आंख से दिखना हुआ मुश्किल
पैर से चलना हुआ बोझिल
कान से सुनना हुआ कम
हाथ काम से लगने लगे थम
मानव ने प्रभु से ध्यान लगा पूछा
प्रभु अपने कोई चेतावनी नहीं दी
अब तो बचपन से बुढ़ापा आ गया

प्रभु बोले मैं तो संकेत देता रहा
पर तू तो माया में रस लेता रहा
तू तो अपने में ही खोया रहा
अब सब कुछ त्याग
हरि भजन में रख राग
कल्याण कर जो हो सके
तन मन से सेवा कर
यही है सच्चा साथी यही साथ जाएगा
खाली हाथ आया जग में खाली हाथ जाएगा
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एक महीने पहले

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