स्वर्ग की कामना हर मानव करता
उसके लिए क्या क्या यत्न करता
व्रत रखता, तीर्थ करता
दान पुण्य करता
उसके लिए भगवान से क्या क्या मन्नतें मांगता
क्या आपने एक पल भी सोचा है,
कि स्वर्ग में तो मानव रह ही रहा हैl
भोर उठते ही बटन दबाया
अंधेरा उजाला बन गया
दूसरा बटन दबाया पंखा चल गया
तीसरा दबाया एसी चल गया
ठंडी हवा से घर भर गया
नल खोला ठंडा, गरम पानी आ गया
जेब से मोबाइल निकला देश दुनिया की खबर आ गई
हज़ारों मील दूर बैठा व्यक्ति
आपके सामने नजर आ जाता
आज का सामान्य व्यक्ति भी
सब सुख सुविधाओं से संपन्न हो गया
जो मिल जाता उसकी कीमत कम हो जाती
एसी चल रहा सामान्य बात है
अभी बंद हो जाए तो परेशानी
मोबाइल है तो कोई खुशी नहीं
नेटवर्क चला जाए तो माथे पे बल आ जाता
अपना घर है तो कोई खुशी नहीं
दूसरे का बड़ा है तो यही दुख है
अपनी गाड़ी है तो सामान्य बात है
पड़ोसी की बड़ी है तो यही दुख है
इस धरती पर एक दूसरी दुनिया भी मौजूद है
जहां बिजली नहीं लालटेन जलती
पानी के लिए घंटों लाइन लगती
जहां दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती
बच्चों के सपने स्कूल जाने से पहले ही टूट जाते
तन ढकने के लिए कपड़ा नहीं
जहां धूप से बचने के लिए पेड़ की छाया नहीं
हम डाइट चार्ट खोजते
वे अगली रोटी की चिंता करते
स्वर्ग और नरक यहीं हैं, इस धरती पर, इसी शहर में
कुछ लोग कठिन परिस्थिति में भी मुस्कराते
कुछ सब कुछ होने पर भी शिकायतों से बाहर नहीं आते
स्वर्ग कोई जगह नहीं
एक एहसास है संतोष का
नरक कोई जगह नहीं
उस अहसास को भूल जाना है
ऊपर बैठा भगवान भी मुस्कराता होगा
कि मैने तो इन्हें स्वर्ग भेजा था
पर वहां भी इन्होंने शिकायतों का अम्बार लगा दिया
ईश्वर का कृतज्ञ हो जाओ
क्योंकि कृतज्ञ मन में ही वो निवास करता है
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