आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सुखी जीवन

                
                                                         
                            जीवन है एक ऐसी किताब
                                                                 
                            
जिसका एक भी पल, सांस
वापस लौटकर नहीं आते
तो भी मानव दुर्गुणों को पाल
असंयमित जीवनचर्या अपना
अतीत के पछतावे में
भविष्य की चिंता में
अपने वर्तमान के अनमोल पल
यूं ही गंवाता रहता
कटु शब्दों रूपी वाण चला
दूसरों को आहत करता रहता
मौन रह कर, कम बोलकर
दुश्मनो और विवादों को जीता जा सकता

प्रकृति में बहुत कुछ है
कुछ उपयोगी, कुछ अनुपयोगी
स्वास्थ्य के लिए संयमित रह कर
बीमारी से बचा जा सकता
जितनी कम हो जरूरत
उतनी होती अच्छी सूरत
अपनी प्रतिभा, प्रेरणा को
संजोय रखने का तंत्र ही कहलाता
सुखी जीवन का मंत्र
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर