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दुनिया का मेला

                
                                                         
                            ये दुनिया भीड़ का रेला
                                                                 
                            
यहां हर इंसान है अकेला
हंसता दिखता ऊपर से
भीतर से उदास रहेला
ये दुनिया भीड़ का रेला

गलियों गलियों शोर मचा है
हर इंसान अपने रंग में रंगा है
चेहरों पर मुस्कान सजी है
भीतर भीतर घुटन भरेला
ये दुनिया भीड़ का रेला

कोई दौड़े दौलत के मारे
कोई भागे शोहरत के पीछे
सब के संग में बैठ बैठ भी
मन क्यों सूना लगे अकेला
ये दुनिया भीड़ का रेला

संबंधों के धागे कच्चे
स्वार्थ लगें सब के ही अच्छे
जब तक दम सब साथ निभाएं
सूखे पत्ते सा छोड़ें अकेला
ये दुनिया भीड़ का रेला

मोबाइल में दुनिया बस्ती
फिर भी मन में वीरानी बस्ती
सौ सौ साथी स्क्रीन पे रहते
दिल की चौखट तब भी तरसेला
ये दुनिया भीड़ का रेला

भीड़ भरे इन बाजारों में
कौन यहां है अपना तेरा
सबको अपनी प्यास बुझानी
कौन सुने ये दर्द तेरा
ये दुनिया भीड़ का रेला

जब सब आशा छूट जाए
जब सब रिश्ता टूट जाए
नाम प्रभु का जप ले बंदे
वो ही बेड़ा पार करेला
ये दुनिया भीड़ का रेला

ना कोई अपना ना है बेगाना
दो दिन का है जग में ठिकाना
माटी का तन माटी हो जाना
राम नाम की नाव चढ़
कट जाएगी दुख की बेला
ये दुनिया भीड़ का रेला
यहां हर इंसान अकेला
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2 महीने पहले

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