जीवन है क्षण भंगुर मानव का
असीम हो सकता प्रभाव उसका
अच्छे कर्म विचार निस्वार्थ प्रेम
हृदय में जीवित रह सकता
यही कहलाती असली विरासत
कलाकार लेखक चित्रकार संगीतज्ञ
कल की सीमाओं को लांघकर
मानव हृदय में जीवित हो जाते
बड़े-बड़े संत जन भले आज जीवित न हों
मानव हृदय में वह अमर हो गए
सूरदास तुलसीदास बाल्मिक और विवेकानंद
इनका योगदान समाज में सदा इनको जीवित रखता
आंतरिक गुण यदि है तो मानव
सदियों तक मन में जीवित रहता
निस्वार्थ भाव से सेवा करना
मन में सबके जगह बनाता विशेष
ऐसे मानव जन जन के मन में
अमिट छाप हैं छोड़ जाते
वही मानव सच्चे अर्थों में
असली विरासत हैं कहलाते
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