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बात ऐसी नहीं जो तुमसे कह न सकूं

                
                                                         
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बात ऐसी नहीं जो तुमसे कह ना सकूं
बात ऐसी नहीं जो तुमसे कह न सकूं
सितम ऐसा नहीं जो मैं सह न सकूं ।

आह भरना भी लेकिन मुहाल हो गया
घबराने लगा हूं तन्हा मैं रह न सकूं ।

वस्ल में क्या हुआ याद कुछ भी नहीं
हिज्र में क्या हुआ ये मैं कह न सकूं ।

ख़ामोशियों का भी अपना एक शोर है
सब तरफ अम्न है ये मैं कह न सकूं।

कोई तो हो जो समझे मेरे मन की बात
हर किसी से हाल-ए-दिल मैं कह न सकूं।
-ओम गोपाल शर्मा 
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3 महीने पहले

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