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छूट जाता है बचपन से जवानी तक का सफ़र

                
                                                         
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स्कूल, दोस्त और रिश्तेदारों की नज़र।
बदल जाते हैं रिश्ते, नए लोग और कुछ अधूरे ख़्वाब,
बस चलती रहती है यादों की बारात।

थम जाती हैं ज़िंदगी से सारी मुलाकातें,
बचपन की वो प्यारी बातें,
जवानी के कुछ अनकहे अल्फ़ाज़,
बस चलती रहती है यादों की बारात।

टूट जाता है हर एक सपना,
किसी का भरोसा, रिश्ते, उम्मीद,
और दिल का कोई अपना,
बस चलती रहती है यादों की बारात।

बिखर जाती है हर खुशी,
किसी के चेहरे की मुस्कान,
तो किसी की आँखों की नमी,
बस चलती रहती है यादों की बारात।
— नूतन झा
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10 घंटे पहले

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