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हम बिखरे तुम संभालो

                
                                                         
                            हम बिखरे तुम संभालो
                                                                 
                            
इसी बात से एक नई
शुरूवात हुई थी न
फिर कहा गई वो बातें
आज हम बिखरे पड़े हैं
तुम संभालने क्यूं नहीं आते
आज हम अनसुलझे से लग रहें
दुनिया के सवालों के सामने
तुम सुलझाने क्यूं नहीं आते
आज हम अकेले से लग रहें
तुम साथ देने क्यूं नहीं आते
हम बिखरे तुम संभालो
इसी बात से एक नई
शुरूवात हुई थी न


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6 वर्ष पहले

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