आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

एक दिन हमारी ज़रूर होगी

                
                                                         
                            आज थोड़ी बे-आरामी होगी, कल इसमें ज़रूर आशियानी होगी,
                                                                 
                            
आज मेहनत दुखदायी होगी, लेकिन एक दिन निरंतर सुखदायी होगी।
आरामदायी का पर्दा अब बिस्तर से हटाना होगा,
क्योंकि कल देश को उच्चतम कक्ष पर ले जाना होगा!

मन करेगा छोड़ दूँ, अराजकताओं को तोड़ दूँ,
अराजकताओं की बातों को ध्यान कर, इस दुनिया को मैं मोड़ दूँ!रोना नहीं... हौसला बाँधूँ,
दिन हो या रात, अपने मन की कठोरता साकारूँ!

आज मानो हार होगी, लेकिन कल वही नयी आस में एक आग होगी,
जीतेंगे हम सारे सपने, चाहे जितनी भी हों मुश्किल सड़कें!
जीत की फ़तह हमारी होगी—एक दिन नहीं, लेकिन एक दिन जरूर हमारी होगी!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर