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अंबे अमल मति वर दे

                
                                                         
                            अंबे अमल मति! वर दे।
                                                                 
                            
सकल साध्य हो तू महारानी
सहज सुभाव दो वरदायिनी
तम तिरोहित कर के देवी
जग अमल धवल कर दे
अंबे अमल मति वर दे।

शुद्ध पवित्र हो मेरी वाणी
रहूँ सदा मैं तेरा ही ध्यानी
तू ज्योतिर्मयी ज्ञान की देवी
चहुँ ओर उजास भर दे
अंबे अमल मति! वर दे।

अवचेतन में भ्रमित चित्त है
मन विचार में अवगुंठन है
सकल रूप में तुम्हीं शारदे
जीवन सरल कर दे
अंबे अमल मति! वर दे।

कलमलहरिणी विशद व्यापिनी
कोकिल कंठी श्वेतांबरी
नव प्रभास में नव उल्लास भर
वरदहस्ता ब्रम्हप्रिये!
अंबे अमल मति! वर दे।

गार्गी मैत्रेयी घोषा अपाला
यज्ञसेनी द्रुपद बाला
गाकर तेरी महिमा मैया
विदित विश्व भई अंबे
तिमिर तिरोहित कर दे
अंबे अमल मति वर दे।
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