कलम ने आज सिसककर पूछा,
क्यों ज्ञान का आकाश धुंधला है?
क्यों अक्षर की पावन चौखट पर,
संशय का पहरा गहरा है?
जब शिक्षा ही प्रश्नों में घिर जाए,
तो उत्तर किससे माँगेंगे?
जो दीप जलाने निकले थे,
क्या वे ही अँधियारा बाँटेंगे?
विद्यालय केवल भवन नहीं,
राष्ट्र की साँस, समाज की धड़कन हैं।
इनसे ही भविष्य के पथिक,
संस्कारों के प्रथम स्पंदन हैं।
निर्णय यदि जनहित में हों तो,
जन-मन को विश्वास भी मिले;
पर शिक्षा पर हर परिवर्तन,
संवादों का प्रकाश भी मिले।
ज्ञान न सत्ता का आभूषण,
न किसी मत का व्यापार बने;
हर बालक का सहज अधिकार,
जीवन का प्रथम आधार बने।
आओ ऐसा समय रचें हम,
जहाँ शिक्षा निर्भय मुस्काए;
विवेक, करुणा, सत्य और श्रम से,
भारत का भविष्य जगमगाए।
-नीलचित्रा व्यास
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