आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सावन में प्रिय याद सताती

                
                                                         
                            सावन में प्रिय याद सताती
                                                                 
                            

साजन की आई है पाती ।
सावन में प्रिय याद सताती ।।

हृदय वेदना भेजे लिख कर ।
सपनों में छिप गई तू दिख कर ।।
क्यों मुझको इतना तड़पाती ।
सावन में प्रिय याद सताती ।।

तेरी चूड़ी तेरी बिंदिया ।
ले गई संग में मेरी निंदिया ।।
भाभी मुझको छेड़ जगाती ।
सावन में प्रिय याद सताती ।।

पाती पढ़कर आंँख बही है ।
मेरा भी तो हाल यही है ।।
प्रीतम के बिन मैं अकुलाती ।
सावन में प्रिय याद सताती ।।

बिरहन सी रातों में जगती ।
उलझे मन से आधा सजती ।।
मुझे छेड़ने सखियांँ आती ।
सावन में प्रिय याद सताती ।।
-नीलम अग्रवाल रत्न
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर