सावन में प्रिय याद सताती
साजन की आई है पाती ।
सावन में प्रिय याद सताती ।।
हृदय वेदना भेजे लिख कर ।
सपनों में छिप गई तू दिख कर ।।
क्यों मुझको इतना तड़पाती ।
सावन में प्रिय याद सताती ।।
तेरी चूड़ी तेरी बिंदिया ।
ले गई संग में मेरी निंदिया ।।
भाभी मुझको छेड़ जगाती ।
सावन में प्रिय याद सताती ।।
पाती पढ़कर आंँख बही है ।
मेरा भी तो हाल यही है ।।
प्रीतम के बिन मैं अकुलाती ।
सावन में प्रिय याद सताती ।।
बिरहन सी रातों में जगती ।
उलझे मन से आधा सजती ।।
मुझे छेड़ने सखियांँ आती ।
सावन में प्रिय याद सताती ।।
-नीलम अग्रवाल रत्न
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