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हे माधव

                
                                                         
                            ॥ हे माधव ॥
                                                                 
                            
आराम तनिक नहीं पाता हूँ,
जाने क्या–क्या कर जाता हूँ।
बैठा रहूँ न एक पल मैं,
जाने क्या–क्या कर जाता हूँ॥
अब तो मिलने आओ माधव,
अब तो मिलने आओ...
संग अपने थोड़ा माखन लाना,
ना–ना, खाना नहीं मुझे माखन,
खाना तुम... बस देख निहारूँ,
कैसा लगता माखन खाता॥
एक विनती यह भी है माधव,
हो सके तो ले चलना गोकुल की गलियों में।
थोड़ा देखूँ तेरे खेल निराले,
वो गेंद, मटकी फोड़न,
वो तेरे बाँसुरी की धुन का नर्तन।
कुरुक्षेत्र में बोले थे तुमने—
सारे माया–खेल तुम्हारे,
मृत्यु, जन्म, पत्ता, पानी, सारे मेल तुम्हारे।
फिर तो मैं तुम्हारा, ये विनती तुम्हारी,
अपनी विनती सुन लो माधव...
अब तो मिलने आओ माधव,
अब तो मिलने आओ माधव॥

 
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एक घंटा पहले

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