ख्वाब का मेरे
है पहला सफर,
धीरे-धीरे पूरी करूँगी
सारी डगर।
इक मैं
और मेरी दोस्त,
न कोई आस
न कोई पास,
इक अंधेरी शाम थी
बस हमारे नाम।
दो पल का साथ
खुशियों भरा एहसास
सफर का छोटा कदम,
आँखों में चमक
सुकून भरी मुस्कान।
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