आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बेईमानी ज़मीन के साथ क्यूँ है?

                
                                                         
                            ऐ खुदा तेरी ज़मीन आसमान जितनी गहरी है
                                                                 
                            
पर एक शिकायत है,
कि तूने जो आसमान बनाया वह ज़मीन से महँगा क्यूँ है?
आसमान के परिंदे तो अक्सर आजाद ही रहते हैं ,
फूलों से महकती ज़मीन को कुचले जाने का गम क्यूँ है?
मुसाफिर के दर्द का संबंध आसमान के प्रति लालची होने से होता है
पर बेईमानी ज़मीन के साथ क्यूँ है?
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर