ऐ खुदा तेरी ज़मीन आसमान जितनी गहरी है
पर एक शिकायत है,
कि तूने जो आसमान बनाया वह ज़मीन से महँगा क्यूँ है?
आसमान के परिंदे तो अक्सर आजाद ही रहते हैं ,
फूलों से महकती ज़मीन को कुचले जाने का गम क्यूँ है?
मुसाफिर के दर्द का संबंध आसमान के प्रति लालची होने से होता है
पर बेईमानी ज़मीन के साथ क्यूँ है?
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