कविता : मौज....
जिंदगी खाने के लिए
पीने के लिए है
जिंदगी मजे के साथ
जीने के लिए है
इस लिए मजे से खाओ
मजे से पियो
अपनी अपनी जिंदगी
मजे से जियो
क्या पता कल सुबह हमें
मौत ले न जाए कहीं
मौज करना है आज करो
कल हम रहें या नहीं
मौज करना है आज करो
कल हम रहें या नहीं.......
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