कविता : ख़टपटी....
मैडम तुम घर से
निकल रही हो
एक अर्ध नग्न हो
कर चल रही हो
बुरा मत मानना तुम से
मेरी एक अर्जी है
अर्ध नग्न या नग्न हो के चलो
ये तुम्हारी मर्जी है
मगर नजारा कुछ अटपटी
कुछ चटपटी है
असल में ये देख मेरे दिल में
भी थोड़ी खटपटी है
असल में ये देख मेरे दिल में
भी थोड़ी खटपटी है.......
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