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कविता : इंसान, इंसान नहीं....

                
                                                         
                            कविता : इंसान, इंसान नहीं....
                                                                 
                            
एक दूसरे का दिमाग
ऐसे चाटने लगा है
आज इंसान, इंसान को
ही काटने लगा है

ये देख कर कुत्ता अपना
वर्चस्व ही तोड़ रहा
वह तो किसी भी शख्स को
काटना भी छोड़ रहा

मन को बहुत भाया कुत्तों में
परिवर्तन आया ऐसा
मगर इंसान, लगने लगा
एक राक्षस जैसा
मगर इंसान, लगने लगा
एक राक्षस जैसा.......

 
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एक घंटा पहले

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