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कविता : घास....

                
                                                         
                            कविता : घास....
                                                                 
                            
बकरा घास को
खा जाता है
शेर घास को नहीं
खाता है

तसर्थ घास के लिए
शेर भगवान है
बकरा घास के लिए तो
एक शैतान है

कौन किसके साथ नहीं
कौन किसके साथ है ?
देवियों सज्जनों यही तो
सोचने वाली बात है
देवियों सज्जनों यही तो
सोचने वाली बात है.......

 
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2 महीने पहले

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