कविता : आघात....
सोचा थोड़ी थोड़ी
बरसात होगी
प्रिय तुम हमारे
ही साथ होगी
फिर सुहानी
रात होगी
मीठी मीठी सी
बात होगी
मगर न
बरसात हुई
तुम हमारे न
तो साथ हुई
न तो सुहानी
रात हुई
न तुम से मीठी
बात हुई
हुई तो अंधेरी
रात हुई
अपने साथ यही एक
आघात हुई
अपने साथ यही एक
आघात हुई.......
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