आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कविता : आघात....

                
                                                         
                            कविता : आघात....
                                                                 
                            
सोचा थोड़ी थोड़ी
बरसात होगी
प्रिय तुम हमारे
ही साथ होगी

फिर सुहानी
रात होगी
मीठी मीठी सी
बात होगी

मगर न
बरसात हुई
तुम हमारे न
तो साथ हुई

न तो सुहानी
रात हुई
न तुम से मीठी
बात हुई

हुई तो अंधेरी
रात हुई
अपने साथ यही एक
आघात हुई
अपने साथ यही एक
आघात हुई.......

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर