छोटे कद से बड़े पद की
एक सच्ची कहानी।
कद छोटा पर हौसला बड़ा।
घर कच्चा पर अरमान ऊँचा।
सर्कस वाले लेने आये उसे 5
लाख में
उसका,तमाशा बनाने के लिए।
पर पिताजी ने उसे भेजा नहीं,
केवल, उनको पढ़ाने के लिए।
क्योंकि अपने के सपने
थे उसे डॉक्टर बनाने के लिए।
उसने बीएससी की और चला
गया वो मेडिकल डिपार्टमेंट में।
पर विडम्बना देखिए मेडिकल
काउन्सिल ने उसके छोटे कद
को लेकर
उसे अयोग्य घोषित कर दिया।
पर फिर भी
वो रुका नहीं और झुका नहीं।
और हिम्मत उसने हारी नहीं।
और हाई कोर्ट
में अपनी याचिका दायर की।
उनकी यहाँ सुनवाई तो हुई।
मगर हाई कोर्ट ने भी
उसे अयोग्य घोषित कर दिया।
मगर फिर
भी वो यहाँ पर भी रुका नहीं।
और एक बार फिर
उसने हिम्मत और साहस का
परिचय देते हुए। सुप्रीम कोर्ट
में अपनी गुहार लगाई।
और सुप्रीम कोर्ट ने उसकी
शैक्षणिक योग्यता को देखते
हुए उसे योग्य घोषित करार
देते हुए कहा कि
कद से किसी की योग्यता व
अयोग्यता का आंकलन
नहीं किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद
उसने साइंस में PH.ED. की
और डॉक्टर की ट्रेनिंग की
और डॉक्टर बने ये कहानी है
गुजरात के MBBS श्रीमान
डॉक्टर गणेश बरेया जी की।
जो किसी दिन
सर्कस में तमाशा बनने वाला
आज अस्पताल में अपनी
सेवाएँ दे रहा है और कइयों
की जिंदगियाँ बचा रहा है।
ये उनकी मेहनत, अभ्यास,
प्रयास, हिम्मत, जुनून और
उनकी पढ़ाई की मेहरबानी है।
और उनके समर्पण
और, सफलता की कहानी है।
ये
महज एक कहानी ही नहीं है।
ये,
उन लोगों पर एक तमाचा है।
जो जरा-जरा सी परेशानियों
पर अपना हौसला खो देते है।
और
एक बार असफल हो जाने पे
अपनी
किस्मत का वो रोना रो देते है।
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