काश तुम्हारे जैसी विचारधारा मेरी भी होती,
तो मैं भी रोज़मर्रा के कामों को निपटाके रात में सुकून से सोती |
किसानो की गुहार को, शाहीन में औरतो की पुकार को,
मैं सहज ही सियासी और मज़हबी मुद्दा बताकर,
आज रसोई में क्या पकेगा इस बात में मशरूफ होती |
काश तुम्हारे जैसी विचारधारा मेरी भी होती,
तो मैं भी रोज़मर्रा के कामों को निपटाके रात में सुकून से सोती |
देश में मैडल लाने वाली शोषित पहलवान के प्रतिवाद को ,
उसे लोगों से मिले साथ को, और अदालत से मिले न्याय को ,
सुनकर - "बहुत बुरा हुआ, न्याय तो मिलना चाहिए " कहती ,
फिर कुछ दिनों में ही भक्षक के बेख़ौफ़ जश्न को भूल,
मैं अपने ही बेटी को कराटे की क्लास ले जा रही होती |
काश तुम्हारे जैसी विचारधारा मेरी भी होती,
तो मैं भी रोज़मर्रा के कामों को निपटाके रात में सुकून से सोती |
और हाईवे पे हुई कई दुर्घटनाओं की जानकारी से परे
मैं नए रास्तो का निर्माण देख गर्वित महसूस करती,
और उन रास्तो के समान्तर जाते किसी गली में,
घूमती बच्ची के साथ हुए बर्बरता पर दुखी भी होती,
फिर उस नृशंसता पर मिले आधे अधूरे न्याय को परिणाम समझ पुनः भय मुक्त होती |
काश तुम्हारे जैसी विचारधारा मेरी भी होती,
तो मैं भी रोज़मर्रा के कामों को निपटाके रात में सुकून से सोती |
अपने ताकत का एहसास प्रबल होता दिखता मुझे,
जब किसी के घर पे बुलडोज़र चलने की बात सुनती, और जब रास्तों पे लगी दुकाने गिरती ,
"बहुत अच्छा हुआ, इनके साथ तो यही होना चाहिए",
ये कहकर मैं भी खुद को प्रभावशाली महसूस करती |
काश तुम्हारे जैसी विचारधारा मेरी भी होती,
तो मैं भी रोज़मर्रा के कामों को निपटाके रात में सुकून से सोती |
शिक्षा पे उठे सवालों का समर्थन तो करती पर,
उनपर प्रदर्शन करने वालों को सहज ही नौटंकी का नाम देती,
बच्चें नहीं वहां तो बूढ़े है, ये विद्यार्थी नहीं दरअसल राजनैतिक दल वाले है,
परीक्षा तो फिर दिया जा सकता है, जो मर गए वो मन से कमज़ोर होंगे शायद ,
इस अनशन की क्या ज़रूरत है, एक वैज्ञानिक को इतनी भी क्या चिंता भला?
और इतनी बातें बोलकर मैं अपने छोटे बच्चों को होमवर्क पूरा कराने में लगी होती |
काश तुम्हारे जैसी विचारधारा मेरी भी होती,
तो मैं भी रोज़मर्रा के कामों को निपटाके रात में सुकून से सोती |
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