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देखा जब उसकी तरफ, थी दीवार के ऊपर खड़ी

                
                                                         
                            देखा जब उसकी तरफ, थी दीवार के ऊपर खड़ी,
                                                                 
                            
टिक-टिक-टिक-टिक करती दीवार की वो घड़ी
गोल-मटोल आकार उसका, जादू की उसमें तीन छड़ी,
एक घंटा, एक मिनट, एक सेकंड की कड़ी
जब देखता हूं इसकी तरफ ,समय ठहर जाता है,
टिक-टिक-टिक-टिक करती वो हमको कुछ बताता है।
पल-पल समय हवा की तरह बहता है,
हर समय तेरे भविष्य की कहानी कहता है।
मत बहा व्यर्थ इसे, वरना आ जाएगी मुश्किल कड़ी
कर दिखा कुछ ऐसा कि, जनता देखती रह जाए खड़ी-खड़ी।
पल-पल बोलता समय उसको कुछ बताता है,
यह जीवन हरता और यही जीवनदाता है।
लक्ष्मण की मूर्छित देह जब थी नीचे पड़ी,
हनुमान ने लाकर संजीवनी उसके जीवन में जोड़ दी नई कड़ी।
हर समय तेरे भविष्य की कहानी कहता है,
कर दिखा कुछ ऐसा कि जनता देखती रह जाए खड़ी-खड़ी।
मत बहा व्यर्थ इसे,वरना आ जाएगी मुश्किल कड़ी।।
— विकास कुमार
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4 घंटे पहले

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