के अब तेरी राहों से किनारा क्या करे
इश्क होगा नहीं अब,दोवारा क्या करे
वो गए नहीं,चले गए हमको भूलकर
सफ़र ही छूट गया अब गुज़ारा किया करे
हमें मालूम है वो नहीं आओगे लौटकर
ये मानता ही नहीं दिल अवारा किया करे
हम टूट कर बिखर गए है दर्पण की तरहा
हमें जोड़ने का कष्ट अब दोवारा ना करे
अब कोई मकसद,खास नहीं जीने का
चाँद ही नहीं तो अब,सितारा किया करे
-नीटू मावी
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