आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जगत की रीत

                
                                                         
                            न बोले मुंह से बे मतलब
                                                                 
                            
यहां लोग बड़े सयाने हैं
सब जानके भी न पहचाने
यहां रोग बड़े पुराने है

बातें करे सब ज्ञान की
ना मान किसी को करना है
मन के ज्ञानी सब फिरे
ना ध्यान किसी को करना है

अपनी धुन में सब मगन
यहां शांत आत्मा कोई नहीं
ढूंढ दिन में जग सारा
यहां महान आत्मा कोई नहीं

सुख दुख सुख दुख करता मानव
दोनों का क्या अर्थ यहां
जब दोनों से ही छलके आंसू
फिर दोनों में है फर्क क्या

साथ प्रेम से जी लो जीवन
यह बड़ा अनमोल खजाना है
कोई न आएगा समझाने
ये बड़ा घनघोर जमाना,
-नीटू मावी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर