मेरे कदमों से रंज ए सफ़र छूट गया
कैसे बताऊं मुकम्मल ए जफ़र छूट गया
तक़दीर ने मेरे साथ किया खूब निभाई है
सादे लिबास वाला मेरा हमसफ़र छूट गया
मुसाफिर थे हम जिंदगी की तलाश में कहीं
दूर से जाकर देखा तो कहीं नगर छूट गया
मेरे सर से ना छूटा कभी ग़रीबी का कलंक
जवानी का रंग पहली वर्षा में धूकर छूट गया
-नीटू मावी
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