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मेरी कलम

                
                                                         
                            में तुझ से जुदा तो नहीं पर जुदा लिख दूं
                                                                 
                            
तेरे कदमों के निशां को खुदा लिख दूं

फिर पलट कर नहीं देखा तूने जाने के बाद
खुद की जिंदगी में बिछड़न सदा लिख दूं

तुम्हारे बगैर मुकम्मल उम्र हम कैसे गुजारेंगे
फिर तो अपना जीवन ही मैं, आधा लिख दूं

नफरत तो नहीं तुझ से पर हां गुस्सा हूं मैं
और बता क्या क्या तुझे जाने अदा लिख दूं

तू गिरा देना दो आंसू मेरे जनाजे पर आकर
बता फिर से तेरे हिस्से में किया वफ़ा लिख दूं
-नीटू मावी
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एक महीने पहले

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