हे माधव तूने लिया तो कुछ नहीं
मगर मांगे बगैर मुझे दिया बहुत है
बाली उम्र में बाप का साया तो उठा
पर जिम्मेदारियों का बोझ दिया बहुत है
सुना है सब्र का फल मीठा होता है
देर से मिला पर तूने मुझे कर्ज दिया बहुत है
उजालों को दोपहरी बताया था, मुझको
छाँव बताकर अंधेरा, दिया बहुत है
सुना है ईश्वर भूखा उठता है मगर सुलाता नहीं
भूखा सुलाकर मुझे आंसू दिया बहुत है
और अधिक देकर मुझे शर्मिंदा ना करो
बड़े आराम से तुमने मुझे दर्द दिया बहुत है
नीटू मावी
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