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मावी के तराने मार जाते है

                
                                                         
                            जब समय हो खोटा मानस का
                                                                 
                            
तो लोग तानें मार जाते है

ना अपना भी कोई साथ देता
बस बहाने मार जाते है

अपनों ने लूटा कुछ गैरों ने लूटा
बाकी महंगाई के जमाने मार जाते है

कब तक छुपाऊं मैं ज़ख्मो के निशां को
कभी नए तो कभी पुराने मार जाते है

यहां जितने मुंह है उतनी ही बातें
आधी हकीकत तो आधे फ़साने मार जाते है

बचता हूं इस जंगल में शिकारी बहुत है
कहीं पर तीर तो कहीं पर निशाने मार जाते है

मोहब्बत ए गम से उबर जायें लेकिन
हमें तो मावी साहब के तराने मार जाते है
-नीटू मावी
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2 महीने पहले

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