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लोक दर्शन

                
                                                         
                            बेइमानी की ना नीम है गहरी
                                                                 
                            
धोखे सा ना कोई घात
यारी करियों संगत की
ना बीर की है कोई जात

जागू देखे जगते
लागू करे खखोर
झूठे प्यार ते बटेर भला
वो चांद बना चकोर

जार यार ते दुश्मन सच्चा
जो सामी करे वार
बीर को ना हाथ लगाए
चाहे हो जंग कामिनी हार

फूंस तापते आशिक रह गए
ले उड़ा परदेसी प्रीत
करियों प्यार देसी से
है धोखा परदेसी की रीत

दूर के ढोल सुहाने देखे
अपनों के किया बहने देखे
दूर रहे तो भाई लगे
पास रहे तो कसाई सगे

अपराध करे ते हाथ कंपे
झूठ बोले तो होठ
जुलुम करे तो रूह कंपे
फिर कियू करता है खोट,
-नीटू मावी
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2 महीने पहले

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