आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कहने दो आदत है

                
                                                         
                            वो कुछ भी कहे हम चुप ही रहे
                                                                 
                            
जाने दो इजाजत है
लोगों का काम है कहना
कहने दो आदत है

कर्म देवता कर्म ही पूजा
कर्म बड़ी इबादत है
हीरे से ना खुशी मिले
हीरा एक सजावट है

ना चाहत है ना राहत है
ना योगी लेता इजाजत है
रोगी का या आराम कहे
ना देखे कितनी लागत है
लोगों का काम है कहना
कहने दो आदत,है
-नीटू मावी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर