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मैं भगवानो मैं भगवान हूं

                
                                                         
                            के अब बहुत हुआ है दुर्योधन
                                                                 
                            
जा तुझको प्राण उधार दिए
तू क्या मुझको बांधेगा
मैंने दुष्टों के संहार किए
ना संकोच करूं मैं तेरे इतराने से
क्यों करता तू अंत अनीति
तेरे जैसे ना दिन चार जिए

बोले मुंह से बढ़ चढ़ बोली
सर पर तेरे काल है
जो बांध सके नारायण को
क्या ऐसी भी कोई चाल है
बुद्धि हीन हुआ है दुर्योधन
ये मेरा रूप विकराल है

सब जीव पाखेरू मुख के अंदर
यह मेरा स्वरूप विकराल है

सारी तेरी अंत अनीति
पर मुझ में बहुत समाई है
बुरा भला कहे दूत शांति
ना इसमें तेरी चतुराई है

देख जरा तू गौर से
मैं ही अंजनी का लाल हूं
हृदय अंदर महेश बिराजे
मैं ही ब्रह्मा विष्णु लोकपाला हूं

तू क्यों न जाने अन्यायी
मैं ही बलवानों में बलवान हूं
तू तुच्छ प्राणी बहका बालक
मैं ही अभिमानों का अभिमान हूं

तू नैय्या डुबोए चतुराई दिखाए
मैं ही विद्वानों में विद्वान हूं
दुर्योधन जा पुरखों से पूछ कर आ
मैं ही भगवानों में भगवान हूं
-नीटू मावी
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3 महीने पहले

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