एक दिन हजूरी छोड़ हमे आसमान पे देख लेना
थोड़ा सा इंतजार रख हमे मुकाम पर देख लेना
भूलें नहीं बख़्त हम अपने सभी पुराने ज़ख्मों को
ज़रा सब्र रख एक दिन हमे इंतकाम पर देख लेना
एक रोज़ लाल की होली खिलाएंगे कम्बखत को
बुलाएंगे तुम्हे जश्न में,हमारा इंतजाम देख लेना
ये जो खेल शुरू किया है हमसे आँख मिचौली का
इस खेल का बड़ा भयानक होगा अंजाम देख लेना
दौड़ा लेना अपने सभी घोड़े हाथी ऊंट प्यादे
कौन होगा वज़ीर और कौन होगा गुलाम देख लेना
-नीटू मावी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X