कमाने के चक्कर में साल छूट गई
लगता है डाली से डाल छूट गई
ये बढ़ती उम्र और टूटता हौसला
सब्जी के तलाश में दाल छूट गई
क्या खाक कमाया समय गवां कर
ढांचे के की खोज में खाल छूट गई
उम्र की ठोकरें थपेड़ों की बरसात
अब वो मदकारी भी चाल छूट गई
सोचा घर को चले अब साम हो गई
अंतिम सवारी अभी हाल छूट गई
-नीटू मावी
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