के तेरे बिना हम मर जाएंगे
और भला हम कहां जाएंगे
एक पल भी गवारा नहीं तेरे बिना
तेरी राहों को छोड़ किधर जाएंगे
एक तू ही था ना कोई सहारा
मैं बीच भँवर ना कोई किनारा
सुबह का पता ना साम की खबर
मैं फिरूं अकेला बेघर बंजारा
है लम्बी दूरी ना मंजिल कोई
उजड़ा चमन ना महफिल कोई
अपनों ने कुछ इस कदर मारा हमें
हम मर भी गए और ना कातिल कोई
नीटू मावी
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