चुनाव आये है , तो आयेगा असबाब भी।
जुबा की जंग में, बरसेगा यहां तेज़ाब भी।
रोशनी के दलालो की मुनाफाखोरी देखो,
प्राइस टैग मे लिपटा है खुद आफताब भी।
मै तो विकास के लिए ही वोट मांगता रहा,
कही कलावे पर मिले,तो कही हिजाब भी।
बाज़ार की कीमतें,ख़रीदने नहीं देती सपने,
क्यों अभागा है आम आदमी का ख्वाब भी।
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