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क्यों अभागा है आम आदमी का ख्वाब भी।

                
                                                         
                            चुनाव आये है , तो आयेगा असबाब भी।
                                                                 
                            
जुबा की जंग में, बरसेगा यहां तेज़ाब भी।
रोशनी के दलालो की मुनाफाखोरी देखो,
प्राइस टैग मे लिपटा है खुद आफताब भी।
मै तो विकास के लिए ही वोट मांगता रहा,
कही कलावे पर मिले,तो कही हिजाब भी।
बाज़ार की कीमतें,ख़रीदने नहीं देती सपने,
क्यों अभागा है आम आदमी का ख्वाब भी।
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8 घंटे पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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