मंजिल के रास्ते
बस एक ख्वाब के वास्ते ,
प्रयास है जारी उस पल के वास्ते
मन में लिए संघर्ष का भाव
लगा दिए हर संभव दाव
पैरों पर मेहनत के घाव
फिर भी गतिशील मेरी नाव
किसको सुनाएं यह अजीब दास्तां
दिया है किसी ने स्वयं का वास्ता
खुशी नहीं अब युद्ध की चाह
चाहे कठिन हो अपनी राह
तर्जनी से दिखाई है किसी ने राह
अब उसी से सुनना है ,वाह
न हीं साधन न हीं करवा
उठ चली है संघर्ष की हवा
न मुड़ कर देखूंगा पीछे,
मंजिल दिन दिन आगे खींचे,
चाहे हो हवा का विपरीत रुख
सह लूंगा हर पीड़ा दुख
चाहे तूफान अंगारे हो सम्मुख
नहीं बदलूंगा अपना रुख
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