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प्रिय सखी

                
                                                         
                            प्रियसखी,
                                                                 
                            
‎मैं बस तुमसे मिलना चाहती हूं
‎इस शहर से उस शहर
‎तुमसे मिलन की उम्मीद लिए
‎तुम्हारी तलाश में रोज चलती हूं
‎तुम्हारे मुस्कुराने से ही तो
‎खिलते हैं फूल
‎रंगबिरंगी तितलियां उड़ान भरती हैं
‎प्रिय सखी
‎मैं तुम संग खिलखिलाना चाहती हूं
‎तुम ही तो
‎रंग हो
‎रोशनी हो
‎झिलमिलाते सितारों की इक  लडी हो
‎तुम वो हो
‎जो उतरी हो आसमां से
‎लहराती सी चंचल इक नदी हो
‎प्रिय सखी
‎मैं तुम संग इठलाना चाहती हूं
‎चल सको तो
‎सांझ तलक घूमेंगे साथ
‎मैं तुम संग
‎चाय की टपरी तक जाना चाहती हूं
‎प्रिय सखी
‎मैं तुमसे मिलना चाहती हूं


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एक महीने पहले

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