प्रियसखी,
मैं बस तुमसे मिलना चाहती हूं
इस शहर से उस शहर
तुमसे मिलन की उम्मीद लिए
तुम्हारी तलाश में रोज चलती हूं
तुम्हारे मुस्कुराने से ही तो
खिलते हैं फूल
रंगबिरंगी तितलियां उड़ान भरती हैं
प्रिय सखी
मैं तुम संग खिलखिलाना चाहती हूं
तुम ही तो
रंग हो
रोशनी हो
झिलमिलाते सितारों की इक लडी हो
तुम वो हो
जो उतरी हो आसमां से
लहराती सी चंचल इक नदी हो
प्रिय सखी
मैं तुम संग इठलाना चाहती हूं
चल सको तो
सांझ तलक घूमेंगे साथ
मैं तुम संग
चाय की टपरी तक जाना चाहती हूं
प्रिय सखी
मैं तुमसे मिलना चाहती हूं
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