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मैं सहरा तो दरिया तू है

                
                                                         
                            मैं सहरा तो दरिया तू है
                                                                 
                            
मेरे भीतर बहता तू है।

धरती मन की जब-जब सूखी
बादल बनकर बरसा तू है ।

पतझड़ की आहट पाकर भी
फूलों जैसा खिलता तू है।

उर के वट पर बाॅंधा था जो
मन्नत का वो धागा तू है।

मन की ऊसर,बंजर धरती
भावांकुर सा पनपा तू है।

तुझमें मिलने की चाहत ज्यों
मैं आधा तो पूरा तू है।।

पूरी दुनिया सोयी जब तो ।
मेरे भीतर जागा तू है।।
-नीलम सिंह
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3 महीने पहले

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