तुम्हारा अचानक से जाना
मुझे बहुत दुःख देता है।
मैंने तुम्हें अपना नंबर दिया है,
तुमने उसे अपने iPhone में सेव किया,
फिर भी जाने से पहले
एक दफ़ा मुझे कॉल नहीं किया,
एक दफ़ा मुझे मैसेज नहीं किया।
क्या तुम छोटी हो जाओगी
अगर मुझे पहले मैसेज और कॉल कर दोगी तो?
वैसे तो तुम्हारे लिए
जग जीत लूँ,
पर कुछ तो होना चाहिए ना—
कि किसलिए जीतूँ ये जग तुम्हारे लिए?
तुम कौन हो मेरी?
मैं फिर से रो पड़ा।
तुम ठीक उस वक़्त
मेरी ज़िंदगी में आई थीं,
जिस समय ये लड़का सख़्त हो चुका था,
क्योंकि इससे पहले की घटनाएँ
बहुत दर्दनाक थीं हमारे लिए।
इसलिए कोई लफ़ड़ा नहीं चाहिए था।
फिर तुम टपक पड़ीं।
मैंने तो पूरी कोशिश की
तुमसे दोस्ती करने की,
पर लगता है शायद तुम्हारा कोई है,
इसलिए तुम्हें फ़र्क नहीं पड़ा।
हमें तुम्हारे जवाब,
तुम्हारे कॉल और फ़ोन का
इंतज़ार रहेगा।
नीलम चौरसिया "नील"
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