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चुप न रहो तुम

                
                                                         
                            चुप न रहो तुम,
                                                                 
                            
कुछ तो कहो तुम।
मेरी बनो तुम,
मेरे लिए संवरो तुम।
मेरी ज़िंदगी में आकर बसो तुम,
मुझसे शादी करो तुम।
हम एक बनें,
एक-दूजे के रहें,
मुझे प्यार करो तुम।
तुमसे बातें हों,
तुम्हारे साथ रातें हों,
और मुलाक़ातें हों,
जो बनें हमारी ज़िंदगी के
खूबसूरत किस्से।
शादी से पहले भी
कुछ सुहानी यादें हों।
चुप रहना चुभता है,
अब तो अपनी चुप्पी तोड़ो ना।
अब मेरे साथ रिश्ता जोड़ो ना।
अब तो मेरी अच्छी पत्नी बनो ना।
— नीलम चौरसिया "नील"
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3 महीने पहले

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