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हिंदुस्तान को बचाना है

                
                                                         
                            चलो खाओ एक कसम हिंदुस्तान को बचाना है
                                                                 
                            
जंग ऐसी लड़ना है सबको साथ आना है
हिन्दू मुस्लिम राजनीति ये सब बाद का फसाना है
अभी सारे लोगों को कोरोना से बचाना है

कुछ दिन घर में यूं ही बैठो
अपनो से बिल्कुल ना रूठो
जो रूठ गए है उनको मना लो
जाना कहीं नहीं बस सब को फोन मिला लो
हाल चाल पूछ लो और जान लो कैसी है तबीयत
क्या पता किस हाल में हो वो और कैसी हो उनकी अजियत
हो अगर साहिब-ए-हैसियत तो कुछ काम ये कर दो
अपने आस पास गरीबों के घर खाने का राशन भर दो
लड़ाई बहुत लंबी है इस बीमारी को हराना है
चलो खाओ एक कसम हिंदुस्तान को बचाना है

जो तुम साथ ना दोगे घर से यूंही निकलोगे
देश के साथ तुम भी इस का कहर भुगतोगे
ये याद रखो नुकसान इसमें नहीं सिर्फ तुम्हारा है
इटली चीन जापान और अमेरिका इससे सब हारा है
क्या चाहते हो तुम इटली जैसा हाल हो
पूरा की पूरा देश इससे बेहाल हो
क्या अच्छा लगेगा तुम्हे जब अस्पतालों में लाश ही लाश हो
पूरे देश का सिर्फ विनाश ही विनाश हो
है वक़्त अभी भी जाग जाओ
जिम्मेदार नागरिक बनते हुए ये जिम्मेदारी उठाओ
जो कोई बिना जरूरत बाहर निकले उसको ये बताओ
अगर ख़ुद को और देश को बचाना है
तो कुछ दिन घर पे बिताना है
नवाज़ जितना हो सके उतना और समझाना है
चलो खाओ एक कसम हिंदुस्तान को बचाना है


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले

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