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मगर गरीबी में हो जाते अपने भी सब गैर मियाँ।

                
                                                         
                            दो नावों में एक साथ चाहे हों उनके पैर मियाँ,
                                                                 
                            
किस्मत वाले कर ही लेते सागर की भी सैर मियाँ।

भूखे शेर के आगे खुद नित गुज़रेगा बकरा तो,
आखिर कब तक उसकी माँ भी रहे मनाती ख़ैर मियाँ।

रहना है गर इस बस्ती में सच कहने की आदत छोड़,
पानी में रहकर नहीं करते कभी मगर से बैर मियाँ।

उनके नयन समझकर झील में डूब गये थे धोखे से,
वरना बड़े-बड़े दरिया हम यूँ ही लेते तैर मियाँ।

दौलत है तो बेगाने भी सब अपना ही कहते हैं,
मगर गरीबी में हो जाते अपने भी सब गैर मियाँ।
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42 मिनट पहले

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