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ऐसे हैं कुछ गंदे लोग

                
                                                         
                            ऐसे हैं कुछ गंदे लोग,
                                                                 
                            
फाँसी के-से फंदे लोग।

कब राष्ट्र की चिंता करते,
धृतराष्ट्र जैसे अंधे लोग।

जिन पे लगे न प्यार की चाभी,
जंग लगे वो जंदे लोग।

न जाने कब किस पे बरस पड़ें,
पुलिस के जैसे डंडे लोग।

जेब देख कर करते बातें,
तीर्थों के जैसे पंडे लोग।

अजमाते रहते कितने ही,
फायदे को हथकंडे लोग।

आग दिलों में रखते हैं वो,
मुँह के लेकिन ठंडे लोग।
-नवीन डिमरी 'बादल'
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3 महीने पहले

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