ज़माने के बाद जमाना पड़ता है
एक छोड़ दूजे में जाना पड़ता है
हाड़ से मांस जुदा हो नहीं सकता
लम्हेको वक़्तसे निभाना पड़ता है
-एन. आर. कस्वाँ
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