साथ निभाने केलिए भी समय कम है खिलाफ़त केलिए वक़्त ही कहाँ है!
हमारे पास मुहब्बत केलिए भी वक़्त नहीं नफ़रत केलिए वक़्त ही कहाँ है!
-एन. आर. कस्वाँ
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